कार्यक्रम के विवरण

1.प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना का वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई)

भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय मूल रूप से निवल जोत क्षेत्र और कृषि योग्य बंजर भूमि के वर्षा सिंचित भागों के विकास के लिए 26.02.2009 से एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) नामक एक क्षेत्र विकास कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत शुरु किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यकलापों में अन्य के साथ-साथ रिज क्षेत्र निरूपण, जल निकास लाइन निरूपण, मृदा एवं नमी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नर्सरी लगाना, वनीकरण, बागवानी, चारागाह विकास, सम्पत्तिविहीन लोगों के लिए आजीविका आदि शामिल है।
प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अनुमोदन के बाद आईडब्ल्यूएमपी को इसके एक घटक के रूप में मिला दिया गया। पीएमकेएसवाई के प्रचालन मार्गदर्शी सिद्धांत 26.10.2015 को अनुमोदित किए गए जिनके अनुसार आईडब्ल्यूएमपी को पीएमकेएसवाई के वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) के रूप में कार्यान्वित किया जाता है।

2.डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैः

(i) वाटरशेड विकास परियोजना- 2008 संबंधी सामान्य मार्गदर्शी सिद्धांतों (संशोधित संस्करण- 2011) के अनुसार, पीएमकेएसवाई (वाटरशेड विकास) परियोजनाओं को पूरा करने की अवधि 4-7 वर्ष है। इसके कार्यकलापों को तीन चरणों में बांटा गया है। तैयारी चरण (1 से 2 वर्ष) में मुख्‍यत: विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना, आरंभिक चरण के कार्यकलाप तथा संस्‍थागत और क्षमता संवर्धन शामिल हैं। कार्य चरण (2 से 3 वर्ष) में वाटरशेड विकास कार्य, सम्‍पत्तिहीन व्‍यक्‍तियों के लिए आजीविका कार्यकलाप तथा उत्‍पादन प्रणाली एवं सूक्ष्‍म उद्यम शामिल हैं। समेकन और समापन चरण (1 से 2 वर्ष) में विभिन्‍न कार्यों का समेकन और उन्‍हें पूरा करना शामिल है।
(ii) लागत मानदण्‍ड पहाड़ी एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 15,000 रुपये प्रति हेक्‍टेयर और अन्‍य क्षेत्रों के लिए 12,000 रुपये प्रति हेक्‍टेयर तथा एकीकृत कार्य योजना (आईएपी) जिलों में वाटरशेड परियोजनाओं हेतु 15,000 रुपये प्रति हेक्‍टेयर तक है। जबकि पूर्ववर्ती आईडब्ल्यूएमपी में केंद्र और राज्यों के बीच वित्त पोषण की पद्धति 90:10 के अनुपात में थी, पीएमकेएसवाई के वाटरशेड विकास घटक के तहत वित्त पोषण की पद्धति 60:40 के अनुपात में है। जबकि, पूर्वोत्‍तर राज्‍यों और पहाड़ी राज्‍यों (जम्‍मू एवं कश्‍मीर, हिमाचल प्रदश और उत्‍तराखंड) के लिए केन्द्र और राज्यों के बीच वित्त पोषण पद्धि 90:10 के अनुपात में जारी है। इस कार्यक्रम के तहत परियोजनाओं में वर्षा सिंचित/अवक्रमित क्षेत्रों, जहां सुनिश्‍चित सिंचाई की सुविधा नहीं है, में लगभग 5000 हेक्‍टेयर क्षेत्र के माइक्रो वाटरशेड के समूह शामिल हैं। कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन के लिए केन्‍द्र, राज्‍य तथा जिला स्‍तरों पर समर्पित संस्‍थाएं उपलब्‍ध कराई गई हैं। इस कार्यक्रम में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए 1% और संस्था तथा क्षमता संवर्धन के लिए 5 % का विशेष प्रावधान करके गहन आयोजना और क्षमता संवर्धन पर बल दिया गया है।

(iii) कार्यान्वयन हेतु संस्थागत ढांचा
(क) मंत्रालय स्‍तर: भूमि संसाधन विभाग में वाटरशेड परियोजनाओं के प्रभावी और व्‍यावसायिक प्रबंधन के लिए, सचिव की अध्यक्षता में संचालन समिति के रूप में आवश्यक संस्थागत तंत्र है। यह समिति अन्य के साथ-साथ राज्यों के प्रस्तावों का मूल्यांकन करती है और उन्हें स्वीकृत करती है। इस समिति में भूमि संसाधन विभाग, राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (नीति) आयोग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पेयजल आपूर्ति विभाग, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (ग्रामीण विकास मंत्रालय), पशुपालन, डेरी औऱ मत्स्यपालन विभाग, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, केंद्रीय भूजल बोर्ड, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (ईग्नू) राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में संगठनों (एनआरएसए, इसरो, एफएसआई), वाटरशेड प्रबंधन के क्षेत्र में तीन संगठनों (आईसीआरआईएसएटी, सीआरआईडीए, एमएएनएजीई आदि), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सदस्य, नीतिगत मामलों के लिए विशेष आमंत्रिती के रूप में एनआरएए का प्रतिनिधि, वाटरशेड प्रबंधन के क्षेत्र में तीन से पांच विशेषज्ञ और तीन प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठन शामिल हैं।
(ख) राज्‍य स्‍तर: व्‍यावसायिक सहायता के साथ एक राज्‍य स्‍तरीय नोडल एजेंसी (एसएलएनए) गठित की गई है। राज्‍य में आईडब्ल्यूएमपी के कार्यान्‍वयन के लिए एसएलएनए समर्पित संस्‍था है।
(ग) जिला स्तरः जिले में डब्‍ल्‍यूडीसी ‘ पीएमकेएसवाई परियोजनाओं का पर्यवेक्षण और समन्‍वयन करने के लिए वाटरशेड प्रकोष्‍ठ-सह-डाटा केन्‍द्र (डब्‍ल्‍यूसीडीसी) जिला स्‍तरीय संस्‍था है। राज्‍य सरकारों के विवेक के अनुसार जिला ग्रामीण विकास एजेंसी/जिला परिषद/जिला स्‍तरीय कार्यान्‍वयन एजेंसी/विभाग में डब्ल्यूसीडीसी स्‍थापित किया गया है।
(घ) परियोजना स्तरः परियोजना कार्यान्‍वयन की देखरेख परियोजना कार्यान्‍वयन एजेंसियों (पीआईए) द्वारा की जाती है। वाटरशेड परियोजना संबंधी समान मार्गदर्शी सिद्धांत, 2008 (2011 में संशोधित) के अनुसार, राज्‍यों द्वारा पीआईए के रूप में कार्य करने के लिए पंचायतें, सरकारी और गैर-सरकारी एजेन्सियां चुनी जा सकती हैं। प्रत्‍येक पीआईए में तीन से चार तकनीकी विशेषज्ञों का एक वाटरशेड विकास दल (डब्‍ल्‍यूडीटी) होगा।
(ङ) ग्राम स्‍तर: फील्‍ड स्‍तर पर परियोजना के कार्यान्‍वयन के लिए ग्राम सभा द्वारा वाटरशेड समिति (डब्‍ल्‍यूसी) गठित की जाती है। इसमें कम से कम 10 सदस्‍य होते हैं, जिनमें से आधे सदस्‍य स्व-सहायता समूह (एसएचजी) और प्रयोक्‍ता समूहों (यूजी), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के प्रतिनिधि, महिलाएं और भूमिहीन व्यक्ति होते हैं। वाटरशेड समिति में डब्‍ल्‍यूडीटी का भी एक प्रतिनिधि होगा।

3.नई पहलें

भूमि संसाधन विभाग ने वाटरशेड कार्यक्रम के कार्यान्वयन का नवीकरण करने के लिए नीचे दिए अनुसार अनेक नई पहल की हैं:
(i) परियोजना की आयोजना और निगरानी के लिए माननीय ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा 19.02.2015 को इसरो/एनआरएससी द्वारा विकसित सृष्टि और दृष्टि ‘भुवन पोर्टल’ शुरु किया गया है।
(क) सृष्टि, निगरानी, मूल्यांकन, परिवर्तन आकलन में सहायता करने और वाटरशेड प्रबंधन की योजना बनाने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए विकसित एक जीआईएस आधारित जीओ पोर्टल है।

(ख) दृष्टि, आईडब्ल्यूएमपी परियोजनाओं की रीयल टाइम निगरानी के लिए फील्ड से चित्र लेने सहित डाटा प्राप्त करने का मोबाइल एप्लिकेशन साधन है। इस साधन का प्रयोग आईडब्ल्यूएमपी कार्यों की समुदाय निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।
(ii) विभाग आईडब्ल्यूएमपी में महालेखा नियंत्रक के कार्यालय द्वारा विकसित सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) का कार्यान्वयन कर रहा है। इस प्रणाली का प्रयोग आईडब्ल्यूएमपी के कार्यान्वयन के दौरान लगभग रीयल टाइम में भुगतान करने, व्यय फाइल निष्पादित करने और निधियों के व्यय की जानकारी रखने के लिए किया जा रहा है।
(iii) अन्य मंत्रालयों और राज्यों के परामर्श से एक समामेलन ढ़ांचा विकसित किया गया है। इस ढ़ांचे में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों, एजेंसियों/संस्थाओं का उल्लेख है और इसमें फील्ड स्तर पर समामेलन का प्रयास करने के लिए आईडब्ल्यूएमपी कार्यान्वयनकर्ता संस्थाओं के भीतर जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। समामेलन ढ़ांचा डीपीआर का अनिवार्य भाग होगा।
(iv) भूमि संसाधन विभाग ने आईडब्ल्यूएमपी परियोनजाओँ की समवर्ती निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस संबंध में कई राज्यों ने पहले ही स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियां चुन ली हैं। विभाग ने भी उत्तर, पश्चिम और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए पीएमकेएसवाई के वाटरशेड विकास घटक की तृतीय पक्ष निगरानी और मूल्यांकन के लिए तीन एजेंसियां नियुक्त की हैं। दक्षिण और पूर्व क्षेत्र के लिए एजेंसियों का चयन करने की प्रक्रिया चल रही है।

4. समामेलन

निम्नलिखित के साथ मुख्य बल वाटरशेड विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापरक ढ़ंग से और समय पर निष्पादन पर हैः

एकः उपलब्ध बजट सहायता का अधिकतम उपयोग,
दोः केंद्र और राज्य की संगत स्कीमों के साथ समामेलन और
तीनः परियोजनाओं/परियोजना कार्यकलापों का प्राथमिकता निर्धारण।

तदनुसार, सभी राज्यों (गोवा को छोड़कर) के मुख्य सचिवों से 02.02.2017 को अनुरोध किया गया है। यह ध्यान में रखते हुए की परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए अन्य के साथ-साथ न केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों बल्कि राज्य सरकार के विभागों की स्कीमों और कार्यक्रमों, जो स्कीम के डिजाइन और वारटशेड विकास की समग्र अपेक्षाओं और उद्देश्यों के अनुरूप हों, के समामेलन के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत है, परियोजनाओं में केंद्र और राज्य, दोनों की स्कीमों को शामिल करते हुए उपयुक्त समामेलन ढ़ांचा तैयार करने के लिए विशिष्ट रूप से कार्रवाई शुरू की गई।

संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में तीन विभागों नामतः (I) कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग (II) पशुपालन, डेयरी और मत्सय पालन विभाग और (III) कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की कार्रवाई शुरू की गई।

मनरेगा के श्रम घटक का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यकलाप करने और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के साथ समामेलन में कुछ प्रारंभिक स्तर के कार्यकलाप करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।

अधिसूचना और परिपत्र

अधिसूचना और परिपत्र
क्रमांक शीर्षक अनुलग्नक फ़ाइल Attached/URL
1 Letter to Chairman of all SLNA(except Goa) for qualitative and timely early completion of WDC-PMKSY projects डाउनलोड (2.77 MB) pdf डाउनलोड (2.77 MB) pdf
2 Letter to Chief Secretaries of all States (except Goa) for DPRs of WDC-PMKSY डाउनलोड (134.17 KB) pdf डाउनलोड (134.17 KB) pdf
3 Letter reg promotion of digital transactions डाउनलोड (6.16 MB) pdf डाउनलोड (6.16 MB) pdf
4 Letter to Chief Secretaries of all States (except Goa) for Action in cases of irregularity and or corruption or financial malfeasance डाउनलोड (132.67 KB) pdf डाउनलोड (132.67 KB) pdf
5 Letter to Chief Secretaries of all States (except Goa) for qualtitative and timely execution of WDC-PMKSY projects डाउनलोड (867.26 KB) pdf डाउनलोड (867.26 KB) pdf
6 Funding support for institutions under IWMP for two more years डाउनलोड (166.52 KB) pdf डाउनलोड (166.52 KB) pdf
7 List of scientific equipments suggested for watershed programme Link
8 State-wise Nodal Department for Integrated Watershed Management Programme (IWMP)(uploaded on 22nd Sept 2010) Link
9 Review Meetings Notification/ Letters. Download formats for States Link