विभाग के बारे में

इतिहास/पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड (एनडब्ल्यूडीबी) की स्थापना वर्ष 1985 में पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य देश में बंजर भूमि का वनीकरण और वृक्षारोपण के वृहत कार्यक्रम के माध्मय से उपयोगी इस्तेमाल करना था।

जुलाई, 1992 में, राष्ट्रीय बंजर भूमि बोर्ड का पुनर्गठन किया गया और इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत नव सृजित बंजर भूमि विकास विभाग में रखा गया। इसके बाद, 09-04-1999 की राजपत्रित अधिसूचना (अनुबंध-I) द्वारा बंजर भूमि विकास विभाग का नाम बदलकर भूमि संसाधन विभाग कर दिया गया। परिणामस्वरूप, भूमि संसाधन विभाग के बनने से पर्यावरण और वन मंत्रालय से तकनीकी और सामान्य, दोनों तरह के 32 पद भूमि संसाधन विभाग को अंतरित कर दिए गए।

दृष्टिकोण

भूमि, विशेषकर वर्षासिंचित जोत क्षेत्रों और कृषि योग्य बंजरभूमि की उत्पादकता और आजीविका/आय क्षमता में सतत सुधार सुनिश्चित करना।
उचित एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली विकसित करना जिससे अन्य के साथ-साथ भूमि संबंधी रीयल टाइम सूचना में सुधार होगा, भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा और नीति/आयोजना में सहायता मिलेगी।

मिशन

विभाग का मिशन वाटरशेड विकास कार्यक्रमों में निर्णय निर्माण में हितधारकों को शामिल करते हुए सहभागी दृष्टिकोण के माध्यम से वर्षासिंचित कृषि योग्य और अवक्रमित भूमि का सतत विकास सुनिश्चित करना। बंजर भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में समन्वित प्रयास किए जाने होते है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ते हैं।
दक्ष भूमि उपयोग नीति सहित प्रभावी कृषि सुधार करना और एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली (आईएलआईएमएस) तैयार करने के उद्देश्य से पारदर्शी भूमि अभिलेख प्रबंधन प्रणाली (एलआरएमएस) की व्यवस्था करना। अन्ततः एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली से नागरिकों को काश्तकारी की सुरक्षा मिलेगी, भूमि विवाद कम होंगे, संपत्ति स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए प्रक्रिया सरल होगी, भूमि संपत्ति सौदे आदि धोखाधड़ी-रहित होंगे।

कार्य

भूमि संसाधन विभाग के कार्य इस प्रकार हैं:
1. वर्षा सिंचित/ अवक्रमित क्षेत्रों के विकास के लिए वाटरशेड कार्यक्रम का कार्यान्वयन।
2. राज्यों को भूमि अभिलेख प्रबंधन का आधुनिकीकरण करने और भूमि सूचना प्रणाली तैयार करने में मार्गदर्शन देना और सहयोग करना।
3. निश्चायक स्वामित्वाधिकार प्रणाली शुरु करने में राज्यों के प्रयासों में सहयोग करना।
4. भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) और भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 और संघ के प्रयोजनों हेतु भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों तथा रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 का संचालन।
5. विस्थापित लोगों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन हेतु नीति अपनाने को सुगम बनाना।
6. भूमि सुधार, भूमि काश्तकारी, भूमि अभिलेख, जोतों की चकबंदी और अन्य संबद्ध मामले।
7. देश में मौजूदा जैव ईंधन खेती का मूल्यांकन करना और मूल्यांकन के परिणाम के आधार पर जैव ईंधन मिशन का प्रदर्शन चरण शुरु करना।

उद्देश्य

विभाग के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:
1. एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन की प्रक्रिया के माध्यम से वर्षा सिंचित /अवक्रमित भूमि की उत्पादकता बढ़ाना;
2. व्यापक भूमि शासन प्रणाली, जिसे एकीकृत भूमि सूचना प्रबंधन प्रणाली के नाम से जाना जाता है, स्थापित करने के उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के कार्यान्वयन में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता करना;
3. भूमि सुधारों और भूमि से संबंधित अन्य सम्बद्ध मामलों जैसे भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (आरएफ़सीटीएलएआरआर), राष्ट्रीय पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति, 2007, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 आदि का संचालन करना; और
4. देश में पहले से किए गए पौधरोपण के मूल्यांकन के आधार पर मुख्य रूप से बंजर भूमि पर जैव ईंधन पौधरोपण के प्रसार के साथ राष्ट्रीय जैव ईंधन मिशन का प्रदर्शन चरण शुरु करना।

कार्यालय की अवस्थिति

कार्यालय स्थान
क्र.सं. अवस्थिति प्रभाग
1 भूमि संसाधन विभाग,
एनबीओ बिल्डिंग, जी-विंग,
निर्माण भवन,
मौलाना आजाद रोड,
नई दिल्ली- 110011, भारत
भूमि विनियमन प्रभाग,
प्रशासन अनुभाग,
समेकित वित्त प्रभाग
2 भूमि संसाधन विभाग,
छठा तल, ब्लॉक-11,
सीजीओ कॉम्पलैक्स,
लोधी रोड,
नई दिल्ली – 110003 भारत
वाटरशेड प्रबंधन प्रभाग,
भूमि आर्थिक प्रभाग,
नीरांचल बायो डीजल ईटी,
बायो डीजल, नीरांचल